Monday, July 25, 2016

"हो देखने का मन, छत पर आ जाना... 
पूछे जो कोई नाम, तुम चाँद दिखा देना !

लोग पढ़ेंगे तो, तंज़ कसेंगे तुम पर... 

तुम कहानी से, मेरा नाम मिटा देना !

सुनकर मेरी ख़बर, दिल कभी बैचेन हो...
आँसूओं को थामना, हँस कर सदा देना !

गुज़रा है क्या-क्या, लोग पूछें जो किस्से...
इश्क़ को छिपा लेना, बाक़ी सब बता देना !

बेबस ग़र महसूस हो, बेताबी जो तुम्हें सताये...
बनाकर कागज़ की कश्ती, समंदर में बहा देना !

तकलीफ़ जो बढ़ जाए, भूला ना पाओ ग़र मुझको...
अपने घर के पिंजरे से, उस चिड़िया को उड़ा देना !!"

:- सिद्धांत #Simplysiddh

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Version 2:

"
पूछे जो कोई नाम, तुम चाँद दिखा देना !
अपनी कहानी से तुम, मेरा नाम मिटा देना !

लोग पढ़ेंगे अगर तो तंज़ कसेंगे तुम पर... 

तुम किरदार मेरा, कोई बीमार बता देना !

सुनकर जो मेरी ख़बर, दिल कभी बैचेन हो... 

आँसूओं को थामना, हँस कर सदा देना !

गुज़रा है क्या-क्या, लोग पूछें जो किस्से...
इश्क़ को छिपा लेना, बाक़ी सब बता देना !

बेबस ग़र महसूस हो, बेताबी जो तुम्हें सताये...
कागज़ की कश्ती बना, समंदर में बहा देना !

तकलीफ़ जो बढ़ जाए, भूला ना पाओ ग़र मुझको...
अपने घर के पिंजरे से, उस चिड़िया को उड़ा देना !!"

:- सिद्धांत #Simplysiddh