"हो देखने का मन, छत पर आ जाना...
लोग पढ़ेंगे तो, तंज़ कसेंगे तुम पर...
पूछे जो कोई नाम, तुम चाँद दिखा देना !
लोग पढ़ेंगे तो, तंज़ कसेंगे तुम पर...
तुम कहानी से, मेरा नाम मिटा देना !
सुनकर मेरी ख़बर, दिल कभी बैचेन हो...
सुनकर मेरी ख़बर, दिल कभी बैचेन हो...
आँसूओं को थामना, हँस कर सदा देना !
गुज़रा है क्या-क्या, लोग पूछें जो किस्से...
इश्क़ को छिपा लेना, बाक़ी सब बता देना !
बेबस ग़र महसूस हो, बेताबी जो तुम्हें सताये...
बनाकर कागज़ की कश्ती, समंदर में बहा देना !
तकलीफ़ जो बढ़ जाए, भूला ना पाओ ग़र मुझको...
अपने घर के पिंजरे से, उस चिड़िया को उड़ा देना !!"
:- सिद्धांत #Simplysiddh
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Version 2:
"पूछे जो कोई नाम, तुम चाँद दिखा देना !
लोग पढ़ेंगे अगर तो तंज़ कसेंगे तुम पर...
गुज़रा है क्या-क्या, लोग पूछें जो किस्से...
इश्क़ को छिपा लेना, बाक़ी सब बता देना !
बेबस ग़र महसूस हो, बेताबी जो तुम्हें सताये...
कागज़ की कश्ती बना, समंदर में बहा देना !
तकलीफ़ जो बढ़ जाए, भूला ना पाओ ग़र मुझको...
अपने घर के पिंजरे से, उस चिड़िया को उड़ा देना !!"
:- सिद्धांत #Simplysiddh
गुज़रा है क्या-क्या, लोग पूछें जो किस्से...
इश्क़ को छिपा लेना, बाक़ी सब बता देना !
बेबस ग़र महसूस हो, बेताबी जो तुम्हें सताये...
बनाकर कागज़ की कश्ती, समंदर में बहा देना !
तकलीफ़ जो बढ़ जाए, भूला ना पाओ ग़र मुझको...
अपने घर के पिंजरे से, उस चिड़िया को उड़ा देना !!"
:- सिद्धांत #Simplysiddh
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Version 2:
"पूछे जो कोई नाम, तुम चाँद दिखा देना !
अपनी कहानी से तुम, मेरा नाम मिटा देना !
लोग पढ़ेंगे अगर तो तंज़ कसेंगे तुम पर...
तुम किरदार मेरा, कोई बीमार बता देना !
सुनकर जो मेरी ख़बर, दिल कभी बैचेन हो...
आँसूओं को थामना, हँस कर सदा देना !
सुनकर जो मेरी ख़बर, दिल कभी बैचेन हो...
आँसूओं को थामना, हँस कर सदा देना !
गुज़रा है क्या-क्या, लोग पूछें जो किस्से...
इश्क़ को छिपा लेना, बाक़ी सब बता देना !
बेबस ग़र महसूस हो, बेताबी जो तुम्हें सताये...
कागज़ की कश्ती बना, समंदर में बहा देना !
तकलीफ़ जो बढ़ जाए, भूला ना पाओ ग़र मुझको...
अपने घर के पिंजरे से, उस चिड़िया को उड़ा देना !!"
:- सिद्धांत #Simplysiddh
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